पश्मीना शान और उत्कृष्ट हस्तकला का पर्याय है। लेह-लद्दाख से उत्पन्न और कश्मीर घाटी में फली-फूली पश्मीना की यह पारंपरिक कला पहली बार भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (काशी) तक पहुंची है। वाराणसी में पश्मीना की इस नई खोज को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सतत रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और वाराणसी की कुशल बुनकरों को विभिन्न कला रूपों में विविधता प्रदान करने के सपने से प्रेरणा मिली है। वाराणसी में पश्मीना बुनाई लेह-लद्दाख की महिला कारीगरों को साल भर आजीविका प्रदान करती है। 100% पश्मीना ऊन से बनी यह हस्तनिर्मित पश्मीना शॉल, पश्मीना को एक आवश्यक कश्मीरी कला रूप से एक विशिष्ट बनारसी हस्तकला में विकसित करती है, साथ ही पश्मीना ऊन की अंतर्निहित डिजाइन, दिव्य अनुभूति और विशिष्ट गर्माहट को भी बरकरार रखती है। खादी ब्रांड इस उत्कृष्ट उत्पाद की प्रामाणिकता की गारंटी देता है।
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